Dosha Nivaran: कालसर्प दोष, मांगलिक एवं नवग्रह शांति
कुंडली में ग्रहों के अशुभ योगों, कालसर्प दोष, मांगलिक दोष और नक्षत्र बाधाओं से मुक्ति हेतु काशी के सिद्ध क्षेत्र में शास्त्रोक्त निवारण विधान।
कालसर्प दोष निवारण एवं महापूजा
Kaal Sarp Dosh Nivaran & 12 Types in KashiFirstly, जब जातक की जन्म कुंडली में सभी सातों ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं, तब 'कालसर्प योग' बनता है। यह प्रमुख Dosha Nivaran अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन की बाधाओं को दूर करता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को असफलता, विवाह में अड़चनें और धन हानि का सामना करना पड़ता है। काशी में नागबली और राहु-केतु शांति हवन द्वारा इस दोष का पूर्ण निवारण किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए वैदिक पूजा सेवाएं और जन्म कुंडली परामर्श देखें।

कालसर्प दोष के 12 प्रकार एवं उनके प्रभाव:
- 1. अनन्त कालसर्प दोष: मानसिक अस्थिरता, वैवाहिक कलह।
- 2. कुलिक कालसर्प दोष: पारिवारिक संघर्ष, स्वास्थ्य कष्ट।
- 3. वासुकि कालसर्प दोष: भाइयों से विवाद, व्यापार हानि।
- 4. शंखपाल कालसर्प दोष: माता को कष्ट, विद्या में बाधा।
- 5. पद्म कालसर्प दोष: संतान सुख में देरी, गुप्त शत्रु।
- 6. महापद्म कालसर्प दोष: रोग, ऋण और शत्रुओं से भय।
- 7. तक्षक कालसर्प दोष: पैतृक संपत्ति विवाद, साझेदारी में धोखा।
- 8. कर्कोटक कालसर्प दोष: दुर्घटना भय, भाग्य में रुकावट।
- 9. शंखचूड़ कालसर्प दोष: पिता को कष्ट, राजकार्य में बाधा।
- 10. घातक कालसर्प दोष: रोजगार में अस्थिरता, अपयश।
- 11. विषधर कालसर्प दोष: नेत्र/हृदय रोग, आय में कमी।
- 12. शेषनाग कालसर्प दोष: कोर्ट-कचहरी, गुप्त रोग व बदनामी।
नवग्रह शांति एवं महायज्ञ विधान
Navgrah Shanti & MahayagyaFurthermore, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे जीवन के सुख-दुख नवग्रहों की चाल पर निर्भर करते हैं। कुंडली में नीच ग्रहों की शांति के लिए यह Dosha Nivaran यज्ञ अत्यधिक फलदायी है। काशी में वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा नवग्रह स्तोत्र पाठ और समिधा हवन से इनकी शांति कराई जाती है।
नवग्रह शांति के लाभ:
- ग्रहों की अशुभ महादशा एवं अंतर्दशा के दुष्प्रभावों में कमी।
- नौ ग्रहों की संयुक्त कृपा से आरोग्य, बल, बुद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति।
मांगलिक दोष (भौम दोष) एवं कुंभ / अर्क विवाह
Manglik Dosh Shanti & Kumbh/Ark VivahMoreover, कुंडली के विशिष्ट भावों में मंगल की उपस्थिति से 'मांगलिक दोष' बनता है। यह दोष विवाह में विलंब या वैवाहिक कलह का कारण बनता है। विवाह से पूर्व मंगल भात पूजा एवं विशेष विधान कराना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।
मांगलिक दोष के अचूक उपाय:
- कुंभ विवाह: कन्याओं के लिए कलश या शालिग्राम के साथ विवाह विधान।
- अर्क विवाह: लड़कों के लिए मदार के वृक्ष के साथ विवाह।
- मंगल भात पूजा: शिव लिंग पर चावल का अभिषेक।
शनि दोष, साढ़ेसाती एवं ढैय्या शांति
Shani Sade Sati, Dhaiya & Dosha ShantiIn addition, जब गोचर में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव होता है, तब जीवन में संघर्ष बढ़ता है। इसकी शांति हेतु वैदिक मंत्रों का अनुष्ठान और छाया दान करना आवश्यक होता है।
शनि शांति अनुष्ठान:
- शनि वैदिक मंत्रों के जाप एवं दशांश हवन।
- काशी में विशेष शनि तैलाभिषेक एवं दान।
गुरु चांडाल, ग्रहण एवं केमद्रुम दोष शांति
Guru Chandal, Grahan & Kemdrum DoshaSimilarly, गुरु-चांडाल दोष, ग्रहण दोष और केमद्रुम दोष व्यक्ति के जीवन में मानसिक अशांति लाते हैं। इन सभी दोषों की शांति योग्य आचार्यों द्वारा महामृत्युंजय जाप एवं शिव रुद्राभिषेक द्वारा की जाती है।
💬 WhatsApp पर संकल्प लें (Book Puja)गंडमूल शांति एवं नक्षत्र पूजन विधान
Gandmool Shanti & Nakshatra PujaFinally, मूल नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातकों के लिए नक्षत्र शांति विधान आवश्यक है। इससे माता-पिता और बालक के जीवन के सभी अरिष्टों की निवृत्ति होती है।

मूल शांति का महत्व:
- अरिष्टों की निवृत्ति और आरोग्य की प्राप्ति।
- बालक के उज्जवल भविष्य हेतु नक्षत्र पूजन।
